Friday, March 5, 2010

काश अगर साईं होता ऐसा

ॐ साईं राम

काश अगर साईं होता ऐसा

काश अगर साईं होता ऐसा
मन अभिलाषी सोचे जैसा

आ जाते तुम मेरे द्वारे
दर्शन पाती तेरे प्यारे

निरख निरख तुझको ना थकती
अखियाँ रहती टुक टुक तकती

कभी देखती घर मैं अपना
सच है या कोई है सपना

हाथ पकड तुम्हें भीतर लाती
सुख आसन पर तुम्हें बैठाती

श्री चरणों को धो कर देवा
पाँव दाब कर करती सेवा

फिर पूजा का थाल सजाती
चँदन धूप दिया और बाती

अक्षत, कुमकुम, सुँदर हार
बडे यतन से कर तैय्यार

करती पूजा बडे भाव से
नैवेद्य बनाती अति चाव से

सांजा, उपमा, खीर और खिचडी
छाछ, भात और पूरन पोली

जो व्यँजन मेरे देव को भाते
पलक झपकते वो बन जाते

फिर मैं तुमको भोग लगाती
बडे प्रेम से तुम्हें खिलाती

लौंग, इलायची, पान सुपारी
अर्पण करती तुम्हें मुरारी

तकिये पर कुहनी को टेक
कहते सब का मालिक एक

श्री मुख से शुभ वचन सुनाते
देवा अध लेटे हो जाते

पलकें दिखतीं थोडी भारी
निद्रा की होती तैय्यारी

फिर मैं कहती देवा मेरे
विश्राम करो अब भक्त के डेरे

शेज आरती गाकर स्वामी
तुम्हें सुलाती अँतरयामी

अहो भाग्य मेरा ये होता
जग का स्वामी सुख से सोता

काश अगर कहीं ऐसा होता
काश अगर कभी ऐसा होता

~Sai Sewika

जय साईं राम
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